देश में इस बार जून का महीना पिछले 126 वर्षों के मानसून रिकॉर्ड में दूसरा सबसे सूखा साबित हो रहा है। 21 जून तक देशभर में केवल 57.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 42.2 प्रतिशत कम है। इससे पहले वर्ष 2009 में पूरे जून महीने के दौरान सामान्य से 49 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई थी।
कम बारिश का असर मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के कई राज्यों में देखने को मिल रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून पिछले दो सप्ताह से धीमा पड़ा हुआ था, लेकिन अब बंगाल की खाड़ी में बने नए मौसम तंत्र के कारण इसके दोबारा सक्रिय होने की संभावना है। अनुमान है कि यह सिस्टम मानसून को छत्तीसगढ़ और मध्य भारत की ओर आगे बढ़ाने में मदद करेगा।
इस बीच पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश जारी है। मेघालय के मॉसिनराम में पिछले 24 घंटे के दौरान 530 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि राजस्थान के श्रीगंगानगर में प्री-मानसून गतिविधियों के चलते ओलावृष्टि हुई।
दूसरी ओर, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में भीषण गर्मी का दौर जारी है। मध्य प्रदेश के पांच जिलों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश के 38 जिलों में लू चलने की चेतावनी दी गई है। विदर्भ क्षेत्र के कई जिलों में रात के समय भी गर्म हवाएं चलने की आशंका जताई गई है।
उत्तर प्रदेश का बांदा लगातार दूसरे दिन देश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 42.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज और बहराइच में भी तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा। राजस्थान के श्रीगंगानगर और हरियाणा के रोहतक में भी पारा 42 डिग्री के पार पहुंच गया।
मानसून में देरी का असर कृषि पर भी दिखाई देने लगा है। 12 जून तक खरीफ फसलों की बुआई पिछले वर्ष की तुलना में 3.9 प्रतिशत घटकर 84.6 लाख हेक्टेयर रह गई है। दालों और कपास की खेती का रकबा भी कम हुआ है, हालांकि धान की बुआई में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई और अगस्त की बारिश सामान्य रहने पर ही कृषि क्षेत्र को राहत मिल सकेगी।
मौसम विभाग के अनुसार, 23 और 24 जून को असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश की संभावना है। वहीं ओडिशा, कर्नाटक, केरल, तेलंगाना, कोंकण-गोवा और मध्य महाराष्ट्र में भी तेज बारिश का अनुमान है। दूसरी ओर मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और विदर्भ में हीटवेव की स्थिति बनी रह सकती है, जबकि राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में प्री-मानसून गतिविधियों के कारण आंधी और बारिश होने की संभावना जताई गई है।
