सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) के वरिष्ठ अधिकारी बी.सी. पात्रा को सोशल मीडिया पर कथित रूप से सरकार विरोधी सामग्री साझा करने के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में पारित हुए CAPF बिल 2026 को लेकर सुरक्षा बलों के भीतर और पूर्व अधिकारियों के बीच बहस तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, 1994 बैच के CRPF अधिकारी बी.सी. पात्रा पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो और तस्वीरें साझा कीं, जिनमें चुनी हुई सरकार को हटाने या उसके खिलाफ संदेश प्रसारित किए गए थे। फिलहाल उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
CRPF के अनुसार, वर्दीधारी अधिकारियों से सेवा नियमों और शपथ का पालन करने की अपेक्षा की जाती है। विभाग का कहना है कि यदि कोई अधिकारी नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाती है।
यह मामला नए सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (CAPF) बिल 2026 से भी जुड़कर देखा जा रहा है। इस कानून का उद्देश्य CRPF, BSF, ITBP, CISF और SSB जैसी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है। हालांकि, कई कैडर अधिकारियों का आरोप है कि इस व्यवस्था से IPS अधिकारियों को अधिक लाभ मिलेगा और अन्य अधिकारियों के प्रमोशन के अवसर सीमित हो सकते हैं।
कुछ कार्यरत और सेवानिवृत्त अधिकारियों ने पात्रा के निलंबन पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि पात्रा लंबे समय से कैडर अधिकारियों के अधिकारों और पदोन्नति से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं। वहीं, पूर्व अधिकारियों के संगठन Alliance of All Ex Paramilitary Forces Welfare Association ने इस कार्रवाई को जल्दबाजी में लिया गया फैसला बताया है।
मामले की जांच के लिए एक आईजी स्तर के अधिकारी को नियुक्त किया गया है। जांच के दौरान पात्रा के पिछले एक वर्ष के आधिकारिक संचार, संदेशों और अन्य रिकॉर्ड की समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं सेवा नियमों या अन्य प्रावधानों का उल्लंघन तो नहीं हुआ।
फिलहाल जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष आने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा। वहीं, CAPF बिल को लेकर जारी बहस के बीच यह मामला सुरक्षा बलों और प्रशासनिक ढांचे में चर्चा का विषय बना हुआ है।
