भारतीय ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंदा ने नॉर्वे चेस 2026 के आठवें राउंड में दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को हराकर एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली। इस जीत के साथ 20 वर्षीय भारतीय खिलाड़ी ने एक ही टूर्नामेंट में कार्लसन को दूसरी बार पराजित किया और खिताब की दौड़ में खुद को मजबूती से बनाए रखा।
इससे पहले भी प्रज्ञानानंदा ने टूर्नामेंट के शुरुआती चरण में कार्लसन को मात दी थी। अब आठवें राउंड में काले मोहरों से खेलते हुए उन्होंने नॉर्वे के दिग्गज खिलाड़ी को हराकर अपनी शानदार फॉर्म का प्रदर्शन किया। मुकाबला लंबे समय तक संतुलित रहा, लेकिन समय के दबाव में कार्लसन से हुई गलती का प्रज्ञानानंदा ने पूरा फायदा उठाया और जीत दर्ज कर ली।
यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि प्रज्ञानानंदा भारत के केवल दूसरे खिलाड़ी बन गए हैं जिन्होंने एक ही टूर्नामेंट में मैग्नस कार्लसन को दो बार हराया है। इससे पहले यह कारनामा 2007 में भारतीय शतरंज के महान खिलाड़ी Viswanathan Anand ने किया था, जब उन्होंने लिनारेस इंटरनेशनल टूर्नामेंट में कार्लसन को लगातार दो मुकाबलों में हराया था।
खिताबी दौड़ में रोमांच बढ़ा
आठवें राउंड के बाद नॉर्वे चेस 2026 की अंक तालिका और भी दिलचस्प हो गई है। अमेरिकी ग्रैंडमास्टर Wesley So 14 अंकों के साथ शीर्ष पर बने हुए हैं। फ्रांस के Alireza Firouzja 13 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर हैं, जबकि प्रज्ञानानंदा 12 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर मौजूद हैं। टूर्नामेंट में अभी दो राउंड शेष हैं, ऐसे में खिताब की लड़ाई पूरी तरह खुली हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रज्ञानानंदा की लगातार मजबूत प्रदर्शन क्षमता उन्हें खिताब के प्रमुख दावेदारों में शामिल करती है। हाल के राउंड में उन्होंने शीर्ष खिलाड़ियों के खिलाफ शानदार खेल दिखाया है और दबाव की परिस्थितियों में भी संयम बनाए रखा है।
गुकेश को फिरोजा से हार का सामना
आठवें राउंड के एक अन्य महत्वपूर्ण मुकाबले में मौजूदा विश्व चैंपियन D Gukesh को अलीरजा फिरोजा के हाथों हार का सामना करना पड़ा। सफेद मोहरों से खेल रहे फिरोजा ने एंडगेम में बेहतरीन रणनीति अपनाई और समय के दबाव के बीच गुकेश की गलतियों का फायदा उठाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस जीत से फिरोजा की खिताबी उम्मीदें और मजबूत हो गई हैं।
वहीं, वेस्ली सो और विंसेंट कीमर के बीच क्लासिकल मुकाबला ड्रॉ रहा। इसके बाद खेले गए आर्मागेडन मुकाबले में वेस्ली सो ने जीत हासिल कर अतिरिक्त अंक जुटाए और शीर्ष स्थान पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी।
महिला वर्ग में मिला-जुला प्रदर्शन
नॉर्वे चेस महिला वर्ग में भारत के लिए आठवां राउंड मिला-जुला रहा। भारत की युवा खिलाड़ी Divya Deshmukh को टूर्नामेंट लीडर बिबिसारा असाउबायेवा के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर, अनुभवी भारतीय ग्रैंडमास्टर Koneru Humpy ने अन्ना मुजीचुक के खिलाफ क्लासिकल मुकाबला ड्रॉ रहने के बाद आर्मागेडन गेम जीतकर अतिरिक्त अंक हासिल किए।
महिला वर्ग की अंक तालिका में बिबिसारा असाउबायेवा शीर्ष पर बनी हुई हैं, जबकि अन्ना मुजीचुक और दिव्या देशमुख उनके पीछे हैं। टूर्नामेंट के अंतिम चरण में महिला वर्ग की प्रतिस्पर्धा भी बेहद रोचक बनी हुई है।
क्या है नॉर्वे चेस का आर्मागेडन फॉर्मेट?
नॉर्वे चेस की सबसे बड़ी खासियत इसका अनूठा आर्मागेडन फॉर्मेट है। यदि किसी खिलाड़ी के बीच क्लासिकल मुकाबला ड्रॉ हो जाता है तो विजेता तय करने के लिए आर्मागेडन गेम खेला जाता है। इसमें सफेद मोहरों वाले खिलाड़ी को अपेक्षाकृत अधिक समय मिलता है, लेकिन जीत हासिल करना उसके लिए अनिवार्य होता है। यदि मुकाबला ड्रॉ रहता है तो काले मोहरों वाला खिलाड़ी विजेता घोषित किया जाता है और उसे अतिरिक्त अंक मिलता है। इस नियम की वजह से हर राउंड में परिणाम निकलना लगभग तय हो जाता है और दर्शकों को रोमांचक मुकाबले देखने को मिलते हैं।
प्रज्ञानानंदा की ताजा जीत ने न केवल भारत के शतरंज प्रेमियों को उत्साहित किया है, बल्कि यह भी साबित किया है कि भारतीय युवा खिलाड़ी अब दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को लगातार चुनौती देने की क्षमता रखते हैं। टूर्नामेंट के अंतिम दो राउंड में सभी की नजरें इस बात पर रहेंगी कि क्या प्रज्ञानानंदा इस शानदार फॉर्म को जारी रखते हुए नॉर्वे चेस 2026 का खिताब जीतने में सफल होते हैं।
