रिपोर्ट पर उठा विवाद, केंद्रीय बैंक और PIB ने बताई पूरी सच्चाई
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सोने के भंडार को लेकर हाल के दिनों में एक रिपोर्ट ने देशभर में चर्चा छेड़ दी। रिपोर्ट में दावा किया गया कि RBI ने 22 मई को समाप्त हुए दो सप्ताह के दौरान लगभग 12 अरब डॉलर मूल्य का सोना बेच दिया। यह दावा सामने आते ही सोशल मीडिया और वित्तीय जगत में सवाल उठने लगे कि क्या भारत ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने या रुपये को सहारा देने के लिए सोना बेचा है।
हालांकि, इस पूरे मामले पर अब RBI और सरकार दोनों की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया आ चुकी है। केंद्रीय बैंक ने साफ शब्दों में कहा है कि उसने कोई सोना नहीं बेचा है और उसके पास मौजूद भौतिक सोने का भंडार पहले की तरह 880.52 टन बना हुआ है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
विवाद की शुरुआत एक अंतरराष्ट्रीय आर्थिक विश्लेषण रिपोर्ट से हुई, जिसमें सार्वजनिक आंकड़ों के आधार पर अनुमान लगाया गया कि RBI ने विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में वृद्धि के साथ-साथ अपने सोने के भंडार का कुछ हिस्सा बेचा हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया कि 22 मई तक के दो सप्ताह में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में लगभग 7.5 अरब डॉलर की वृद्धि हुई जबकि सोने के मूल्य में बड़ी गिरावट दिखाई दी। इसी आधार पर सोने की बिक्री की संभावना जताई गई।
हालांकि यह विश्लेषण एक अनुमान था, लेकिन इसके बाद यह दावा तेजी से फैल गया कि RBI ने वास्तव में 12 अरब डॉलर का सोना बेच दिया है।
RBI ने क्या कहा?
विवाद बढ़ने के बाद RBI ने आधिकारिक बयान जारी किया। केंद्रीय बैंक ने कहा कि मीडिया के कुछ वर्गों में सोना बेचने से संबंधित जो रिपोर्टें प्रकाशित हुई हैं, वे सही नहीं हैं।
RBI ने स्पष्ट किया कि उसके पास मौजूद भौतिक सोने का भंडार अभी भी 880.52 टन है और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। साथ ही आम लोगों से अपील की गई कि वे ऐसे मामलों में केवल RBI द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों और सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
PIB ने भी किया फैक्ट चेक
केंद्रीय बैंक के बयान के बाद प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक इकाई ने भी वायरल दावों की जांच की। PIB ने कहा कि RBI द्वारा 12 अरब डॉलर का सोना बेचने का दावा गलत है।
PIB ने RBI के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगातार बढ़ी है। सितंबर 2025 के अंत में यह हिस्सा 13.92 प्रतिशत था, जो मार्च 2026 के अंत तक बढ़कर 16.70 प्रतिशत हो गया। 22 मई 2026 तक यह बढ़कर 16.85 प्रतिशत पहुंच गया। यदि बड़े पैमाने पर सोना बेचा गया होता तो ऐसी स्थिति देखने को नहीं मिलती।
फिर सोने के मूल्य में गिरावट क्यों दिखी?
विशेषज्ञों के अनुसार यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। सोने की मात्रा (टन में) और सोने का मूल्य (डॉलर में) अलग-अलग बातें हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव, मुद्रा विनिमय दर और मूल्यांकन पद्धति के कारण किसी देश के सोने के भंडार का कुल मूल्य घट या बढ़ सकता है, भले ही वास्तविक मात्रा में कोई बदलाव न हुआ हो। RBI के आंकड़ों में भी सोने की मात्रा स्थिर रही, जबकि उसके मूल्य में बदलाव दिखाई दिया।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है सोना?
भारत का सोना भंडार केवल एक निवेश नहीं बल्कि विदेशी मुद्रा भंडार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव के समय सोना एक सुरक्षित संपत्ति माना जाता है।
पिछले कुछ वर्षों में RBI लगातार अपने सोने के भंडार को मजबूत करता रहा है। मार्च 2026 तक भारत के पास 880.52 टन सोना था, जो दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंकों में शामिल होने के लिए पर्याप्त माना जाता है।
रुपये और विदेशी मुद्रा भंडार पर नजर
हाल के सप्ताहों में वैश्विक तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और डॉलर की मजबूती के कारण रुपये पर दबाव देखने को मिला। ऐसे समय में विदेशी मुद्रा भंडार और सोने के भंडार को लेकर चर्चाएं तेज होना स्वाभाविक है।
हालांकि RBI और सरकार दोनों ने स्पष्ट कर दिया है कि सोना बेचने की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। केंद्रीय बैंक का कहना है कि भारत का भौतिक सोना भंडार सुरक्षित है और उसमें कोई कमी नहीं आई है।
12 अरब डॉलर का सोना बेचने की खबर ने निवेशकों और आम लोगों के बीच चिंता जरूर पैदा की, लेकिन अब आधिकारिक स्थिति स्पष्ट हो चुकी है। RBI ने साफ कहा है कि उसके सोने के भंडार में कोई बदलाव नहीं हुआ है और वह अब भी 880.52 टन पर स्थिर है। PIB ने भी वायरल दावे को फर्जी बताया है।
इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि आर्थिक और वित्तीय मामलों में आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर भरोसा करना सबसे सुरक्षित तरीका है। फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार भारत ने अपना सोना नहीं बेचा है और देश का गोल्ड रिजर्व सुरक्षित बना हुआ है।
