गुजरात सरकार ने हाउसिंग सोसायटियों में प्रॉपर्टी ट्रांसफर के दौरान ली जाने वाली फीस को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए नए नियम लागू कर दिए हैं। सरकार द्वारा जारी आधिकारिक गजट के अनुसार 10 जून 2025 से राज्य की सभी हाउसिंग और हाउसिंग सर्विस सोसायटियों में ट्रांसफर फीस की अधिकतम सीमा तय कर दी गई है।
नए नियमों का उद्देश्य सोसायटी प्रबंधन द्वारा प्रॉपर्टी ट्रांसफर के समय की जाने वाली मनमानी वसूली पर रोक लगाना और सदस्यों को राहत प्रदान करना है।
कैसे तय होगी ट्रांसफर फीस
नए प्रावधानों के अनुसार किसी भी मकान, फ्लैट या अन्य आवासीय संपत्ति के ट्रांसफर पर सोसायटी केवल दस्तावेज़ (डीड) में दर्शाई गई कीमत का 0.5 प्रतिशत अथवा अधिकतम एक लाख रुपये तक ही ट्रांसफर फीस ले सकेगी। इनमें से जो राशि कम होगी, वही शुल्क लागू होगा।
इसका मतलब यह है कि कोई भी सोसायटी किसी सदस्य से एक लाख रुपये से अधिक ट्रांसफर फीस नहीं वसूल सकेगी।
ब्लड रिलेशन और कानूनी वारिस को राहत
सरकार ने परिवार के सदस्यों और कानूनी वारिसों को भी बड़ी राहत दी है। यदि संपत्ति का हस्तांतरण ब्लड रिलेशन या लीगल हेयर के नाम बिना किसी आर्थिक लेन-देन के किया जाता है, तो ऐसी स्थिति में कोई ट्रांसफर फीस नहीं ली जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रावधान पारिवारिक संपत्ति हस्तांतरण की प्रक्रिया को आसान बनाएगा।
डोनेशन और डेवलपमेंट चार्ज पर रोक
कई सोसायटियों में ट्रांसफर के समय ट्रांसफर फीस के अलावा डोनेशन, डेवलपमेंट फंड, कंटिंजेंसी फंड और अन्य नामों से अतिरिक्त राशि वसूली जाती थी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित ट्रांसफर फीस के अतिरिक्त किसी भी नाम पर अतिरिक्त शुल्क लेना गैरकानूनी माना जाएगा। यदि कोई सोसायटी ऐसा करती है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
34 साल बाद बड़ा बदलाव
जानकारों के अनुसार ट्रांसफर फीस को लेकर पहली बार 1991 में नियम बनाए गए थे। उस समय शुल्क की सीमा 500 रुपये से 50 हजार रुपये तक निर्धारित की गई थी।
इसके बाद वर्ष 2016 में भी एक अधिसूचना जारी की गई थी, जिसमें पुराने प्रावधानों को बरकरार रखा गया था। हालांकि उस समय हाउसिंग सर्विस सोसायटियों के लिए अलग व्यवस्था रखी गई थी।
अब लगभग 34 वर्षों बाद सरकार ने व्यापक संशोधन करते हुए स्पष्ट और एकसमान नियम लागू किया है।
ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के बाद अंतिम फैसला
सरकार ने इस विषय पर 24 फरवरी 2025 को प्रारूप अधिसूचना जारी की थी। उस पर प्राप्त सुझावों और आपत्तियों की समीक्षा के बाद अंतिम गजट अधिसूचना जारी की गई।
अब 10 जून 2025 के बाद होने वाले सभी प्रॉपर्टी ट्रांसफर पर यही नियम लागू होंगे।
रियल एस्टेट सेक्टर को मिलेगा लाभ
रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियमों से प्रॉपर्टी ट्रांसफर प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी। साथ ही खरीदारों और विक्रेताओं को अनावश्यक वित्तीय बोझ से राहत मिलेगी।
विशेष रूप से अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, राजकोट और गांधीनगर जैसे बड़े शहरों में जहां हाउसिंग सोसायटियों की संख्या अधिक है, वहां इस निर्णय का व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
सरकार का मानना है कि नए नियमों से सहकारी आवास क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और ट्रांसफर प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से चली आ रही शिकायतों में कमी आएगी।
