केरलम में एक बार फिर निपाह वायरस ने दस्तक दे दी है। राज्य में वर्ष 2026 का पहला निपाह संक्रमण मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन हाई अलर्ट पर आ गया है। कोझिकोड जिले के 43 वर्षीय एक व्यक्ति में निपाह वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है। संक्रमित मरीज की हालत गंभीर बताई जा रही है और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, मरीज को शुरुआत में हल्का बुखार और अन्य सामान्य लक्षण दिखाई दिए थे, जिसके बाद उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्थिति बिगड़ने पर उसे कोझिकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया, जहां जांच में निपाह वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद राज्य सरकार ने तत्काल स्वास्थ्य अलर्ट जारी कर दिया।
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि संक्रमित व्यक्ति पिछले कुछ दिनों में कई लोगों के संपर्क में आया था। ऐसे में मरीज के संपर्क में आए सभी लोगों की पहचान की जा रही है और उन्हें एहतियातन क्वारंटीन रहने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पताल के स्टाफ, परिवार के सदस्यों और अन्य संभावित संपर्कों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से घबराने की बजाय सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मरीज ने हाल ही में एक गोदाम किराए पर लिया था और उसकी सफाई का काम स्वयं किया था। स्वास्थ्य विभाग को आशंका है कि इसी दौरान वह निपाह वायरस की चपेट में आया होगा। माना जा रहा है कि गोदाम में फल खाने वाले चमगादड़ों की मौजूदगी रही होगी, जिनके संपर्क से संक्रमण फैल सकता है।
फिलहाल मरीज का विस्तृत रूट मैप तैयार किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें यह पता लगाने में जुटी हैं कि संक्रमित व्यक्ति किन-किन स्थानों पर गया था और उसके संपर्क में कितने लोग आए। राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV) की अतिरिक्त रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
निपाह वायरस को दुनिया के सबसे खतरनाक वायरसों में से एक माना जाता है। यह मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों से फैलता है और संक्रमित जानवरों या संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से भी संक्रमण हो सकता है। इस वायरस से संक्रमित मरीजों में बुखार, सिरदर्द, सांस लेने में दिक्कत, भ्रम की स्थिति और गंभीर मामलों में मस्तिष्क संक्रमण जैसी समस्याएं देखी जाती हैं।
निपाह वायरस की पहचान पहली बार वर्ष 1998-99 में मलेशिया के सुंगाई निपाह गांव में हुई थी। इसी गांव के नाम पर इस वायरस का नाम रखा गया। उस समय यह संक्रमण चमगादड़ों से सूअरों में और फिर सूअरों के संपर्क में आने वाले लोगों में फैला था। उस प्रकोप में 265 से अधिक लोग संक्रमित हुए थे और 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी।
भारत में निपाह वायरस का पहला मामला वर्ष 2001 में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में सामने आया था। उस समय 66 लोग संक्रमित हुए थे और 45 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद 2007 में पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में पांच मामले सामने आए थे, जिनमें सभी मरीजों की मृत्यु हो गई थी।
केरल में पहली बार वर्ष 2018 में निपाह वायरस का प्रकोप देखा गया था। तब संक्रमण के कारण कई लोगों की जान गई थी और पूरे देश में चिंता का माहौल बन गया था। इसके बाद राज्य में समय-समय पर निपाह के मामले सामने आते रहे हैं। वर्ष 2024 में भी राज्य में दो मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें एक मरीज की मौत हो गई थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और बांग्लादेश में निपाह संक्रमण का पैटर्न मलेशिया से अलग रहा है। जहां मलेशिया में संक्रमण मुख्य रूप से सूअरों के जरिए फैला था, वहीं भारत और बांग्लादेश में अधिकांश मामलों में संक्रमण का स्रोत चमगादड़ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे गिरे हुए या आधे खाए हुए फलों का सेवन न करें, बीमार व्यक्तियों के संपर्क में आने से बचें और किसी भी तरह के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। राज्य सरकार का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सतर्कता और सावधानी बेहद जरूरी है।
