उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में स्थित एक व्यावसायिक इमारत में लगी भीषण आग ने 15 लोगों की जान ले ली। इस दर्दनाक हादसे में अधिकांश मृतक 20 से 30 वर्ष आयु वर्ग के छात्र हैं, जो प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार की तैयारी के लिए कोचिंग संस्थान में पढ़ाई कर रहे थे। कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज अस्पताल में जारी है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस तीन मंजिला इमारत में आग लगी, उसे वर्ष 2016 में अवैध घोषित कर गिराने का आदेश जारी किया गया था। इसके बावजूद इमारत में व्यावसायिक गतिविधियां और कोचिंग सेंटर संचालित होते रहे। हादसे के बाद प्रशासन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले का संज्ञान लेते हुए चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही चार आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन भी किया गया है।
हादसे के दौरान कई छात्र जान बचाने के लिए इमारत की पहली मंजिल से नीचे कूद गए। कुछ गंभीर रूप से घायल हो गए। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के डॉक्टरों के अनुसार, 21 से 22 घायलों को अस्पताल लाया गया, जिनमें से कई का इलाज जारी है। पहली मंजिल से कूदने वाले दो छात्रों की पीठ में गंभीर चोटें आई हैं।
इस हादसे ने कई परिवारों को गहरा सदमा दिया है। एक छात्र ने आग लगने के दौरान अपने पिता को फोन कर मदद की गुहार लगाई थी। वहीं एक मृतक युवक की मां ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि समय रहते उचित कार्रवाई होती तो उनका बेटा आज जीवित होता।
घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ट्रॉमा सेंटर पहुंचे और घायलों व मृतकों के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार किसी भी अधिकारी या व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन अब इमारत की सुरक्षा व्यवस्था, फायर सेफ्टी मानकों और संबंधित विभागों की भूमिका की भी जांच कर रहा है।
पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मृतकों के शव उनके परिजनों को सौंपे जाएंगे। पूरे शहर में इस दर्दनाक हादसे के बाद शोक का माहौल है।
