बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। पटना के पाटलिपुत्र थाना में कोर्ट के आदेश पर उनके और उनके सहयोगी मोतीलाल यादव के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। मामला अनुष्का यादव के परिवार को कथित रूप से धमकी देने और घर में जबरन घुसने के आरोपों से जुड़ा है।
पुलिस के अनुसार, यह शिकायत छात्र राजद के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष आकाश यादव ने दर्ज कराई है, जो अनुष्का यादव के भाई हैं। आकाश यादव ने आरोप लगाया है कि 6 जून को तेज प्रताप यादव अपने सहयोगी के साथ उनके पाटलिपुत्र स्थित आवास पर पहुंचे और जबरन घर में प्रवेश करने की कोशिश की। उस समय आकाश यादव घर पर मौजूद नहीं थे।
शिकायत में दावा किया गया है कि परिवार के सदस्यों को गंभीर परिणाम भुगतने और जान से मारने की धमकी दी गई। साथ ही आरोप है कि यदि अनुष्का यादव से मुलाकात नहीं कराई गई तो उनकी बेटी उज्जैनी का अपहरण कराने की धमकी भी दी गई।
आकाश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद उन्हें कई धमकी भरे फोन कॉल आए। इनमें एक कॉल कथित तौर पर अमेरिका के नंबर से किया गया था। शिकायतकर्ता ने पुलिस को कॉल रिकॉर्डिंग भी सौंपी है, जिसकी जांच की जा रही है।
विधि-व्यवस्था एएसपी दिव्यांजली जायसवाल ने FIR दर्ज होने की पुष्टि करते हुए कहा कि मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों और कॉल रिकॉर्ड्स का सत्यापन कर रही है।
वहीं तेज प्रताप यादव ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने इसे राजनीतिक प्रतिशोध और उनकी छवि खराब करने की साजिश बताया है। तेज प्रताप का कहना है कि शिकायतकर्ता को पहले ही कानूनी नोटिस भेजा जा चुका था और उसी का बदला लेने के लिए यह मामला दर्ज कराया गया है।
पूर्व मंत्री ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका और कानून पर पूरा भरोसा है तथा जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ वे कानूनी कार्रवाई करेंगे।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष अनुष्का यादव को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक पोस्ट के बाद तेज प्रताप यादव काफी चर्चा में आए थे। उस विवाद के बाद उन्हें राष्ट्रीय जनता दल और परिवार से निष्कासित कर दिया गया था। फिलहाल यह नया मामला बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है और पुलिस जांच के नतीजों का इंतजार किया जा रहा है।
