केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार और आजीविका को मजबूती देने के उद्देश्य से वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB-G RAM G योजना के तहत राज्यों को अंतरिम बजट आवंटित कर दिया है। कुल 95,692.31 करोड़ रुपये के इस बड़े आवंटन में उत्तर प्रदेश को सबसे बड़ा हिस्सा मिला है। राज्य को 9,721.48 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जबकि पश्चिम बंगाल 8,508 करोड़ रुपये के साथ दूसरे स्थान पर है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित यह नई योजना 1 जुलाई 2026 से लागू होने जा रही है। हालांकि इसके नियमों को अभी अंतिम मंजूरी मिलनी बाकी है, लेकिन राज्यों को योजना के क्रियान्वयन की तैयारी के लिए अंतरिम फंड जारी कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे नई व्यवस्था को समय पर और प्रभावी तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने योजना की घोषणा करते हुए कहा कि राज्यों को धनराशि का आवंटन उनके द्वारा पिछले वर्ष मनरेगा के तहत किए गए खर्च के आधार पर किया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों को बढ़ाना, मजदूरों को नियमित काम उपलब्ध कराना और गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है।
नई VB-G RAM G योजना को मनरेगा के उन्नत और अधिक व्यापक स्वरूप के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का दावा है कि यह योजना केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ग्रामीण आजीविका और स्थानीय विकास परियोजनाओं को भी गति देगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा।
योजना के तहत उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक 9,721.48 करोड़ रुपये का आवंटन मिला है। इसके बाद पश्चिम बंगाल को 8,508 करोड़ रुपये दिए गए हैं। दोनों राज्यों में बड़ी ग्रामीण आबादी और रोजगार की मांग को देखते हुए यह आवंटन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अन्य राज्यों को भी उनकी जरूरतों और पूर्व व्यय के आधार पर धनराशि आवंटित की गई है।
VB-G RAM G का वित्तीय ढांचा मनरेगा से अलग होगा। मनरेगा में मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी, जबकि नई योजना केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में संचालित होगी। इसके तहत अधिकांश राज्यों में केंद्र और राज्य सरकारें 60:40 के अनुपात में खर्च साझा करेंगी।
पूर्वोत्तर राज्यों और हिमालयी क्षेत्रों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। इन राज्यों में केंद्र और राज्य के बीच खर्च का अनुपात 90:10 रहेगा, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर और भौगोलिक चुनौतियों वाले क्षेत्रों को अधिक सहायता मिल सके। वहीं, जिन केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभा नहीं है, वहां योजना का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी।
सरकार का मानना है कि नई योजना ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों को अधिक टिकाऊ और परिणामोन्मुख बनाएगी। इससे ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे और गांवों में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। योजना के माध्यम से ग्रामीण बुनियादी ढांचे के निर्माण, जल संरक्षण, कृषि से जुड़े कार्यों और स्थानीय विकास परियोजनाओं को भी गति मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों के अनुसार, VB-G RAM G योजना ग्रामीण भारत के लिए एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है। यदि इसका प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो यह न केवल रोजगार के अवसर बढ़ाएगी बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
1 जुलाई से योजना के औपचारिक रूप से लागू होने के बाद राज्यों को परियोजनाओं के चयन, श्रमिकों के पंजीकरण और कार्यों के निष्पादन की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। केंद्र सरकार ने राज्यों से योजना के प्रभावी संचालन के लिए सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी करने को कहा है।
ग्रामीण रोजगार और आजीविका को नया आयाम देने वाली इस महत्वाकांक्षी योजना पर अब देशभर की निगाहें टिकी हैं। सरकार को उम्मीद है कि VB-G RAM G ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन के क्षेत्र में एक नया मॉडल स्थापित करेगी।
