पिता की संपत्ति से बेदखली के आदेश को चुनौती देने पहुंचे बेटे को सुप्रीम कोर्ट से न सिर्फ राहत नहीं मिली, बल्कि अदालत की कड़ी फटकार का भी सामना करना पड़ा। शीर्ष अदालत ने राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए बेटे की याचिका खारिज कर दी।
सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने बेटे के रवैये पर नाराजगी जताई। जस्टिस नाथ ने टिप्पणी करते हुए कहा, “तुम किस तरह के बेटे हो? अपने ही पिता से लड़ रहे हो। जाओ और उनकी देखभाल करो, उन्हें शांति से जीने दो।”
मामला राजस्थान के बिलाड़ा स्थित एक मकान से जुड़ा है। वरिष्ठ नागरिक पिता ने भरण-पोषण न्यायाधिकरण में शिकायत करते हुए आरोप लगाया था कि बेटा उन्हें परेशान करता है और उनके शांतिपूर्ण जीवन में बाधा डाल रहा है। इसके बाद ट्रिब्यूनल ने फरवरी 2024 में बेटे को मकान खाली करने का आदेश दिया था।
राजस्थान हाईकोर्ट की सिंगल जज और डिवीजन बेंच दोनों ने इस आदेश को सही ठहराया था। इसके खिलाफ बेटे ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और दावा किया कि संपत्ति पैतृक है, इसलिए उसमें उसका भी अधिकार है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और कहा कि मामले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। अदालत ने वरिष्ठ नागरिक पिता के पक्ष में दिए गए बेदखली आदेश को अंतिम रूप से सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।
यह फैसला वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।
